कोविड मरीजों को एसआरएमएस में मिलेगी प्लाज्मा थेरेपी

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शासन ने दी प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति, गंभीर मरीजों के इलाज की तैयारियां शुरू
कोविड संक्रमित गंभीर मरीजों के शीघ्र जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद में बडा कदम
स्वस्थ होने के बाद कोई भी कोविड पाजिटिव व्यक्ति कर सकता है प्लाज्मा डोनेट
नुक्कड़ संवाददाता, बरेलीः शासन ने एसआरएमएस मेडिकल कालेज को प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति दे दी है। हफ्ते भर में अब यहां कोविड- 19 का इलाज संभव हो सकेगा। इसका लाभ कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को ज्यादा मिलेगा। यह बात एसआरएमएस के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की एचओडी डा.मिलन जायसवाल ने कही। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का अभी तक कोई सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन और इम्यूनिटी का ही सहारा है। लेकिन संक्रमण के बाद गंभीर मरीजों के लिए ज्यादा कुछ करना संभव नहीं है। ऐसे में प्लाज्मा थेरेपी ने उम्मीद बांधी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भी प्लाज्मा थेरेपी से कोविड-19 संक्रमित मरीजों के उपचार पर ट्रायल किया। जिसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दी। प्रदेश सरकार ने एसआरएमएस मेडिकल कालेज को प्लाज्मा थेरेपी से इलाज की अनुमति प्रदान की है। प्लाज्मा थेरेपी के संबंध में डा.मिलन से पूछे गए प्रमुख सवाल और उनके जवाब…

सवाल- प्लाज्मा थेरेपी है क्या ?
जवाब- थेरेपी से पहले प्लाज्मा को जानना आवश्यक है। पानी और प्रोटीन से बना ब्लड का तरल हिस्सा प्लाज्मा कहलाता है। इसके जरिये लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स शरीर की हर सेल्स तक पहुंचती हैं। इसमें इम्युनिटी के महत्वपूर्ण घटक के रूप में एंटीबाडी भी होते हैं। प्लाज्मा थेरेपी ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें प्लाज्मा को ब्लड सेल्स से अलग कर जरूरतमंद गंभीर मरीज को चढ़ाया जाता है। इससे मरीज में एंटीबाडीज पहुंचते हैं जो संक्रमण से लड़ते हैं।

सवाल- प्लाज्मा थेरेपी कैसे काम करती है ?
सवाल- वायरस संक्रमण की स्थिति में शरीर में कुछ दिन उपरांत एंटीबाडीज बनती हैं। जो उस संक्रमण को रोकती हैं और भविष्य में भी इस वायरस के संक्रमण के प्रति सचेत रहती है। एंटीबाडीज ब्लड के प्लाज्मा का हिस्सा होते हैं। ऐसे में संक्रमण से स्वस्थ होने वाले मरीज का प्लाज्मा अगर उसी वायरस से पीड़ित दूसरे मरीज में चढ़ाया जाता है, तो उसके भी शीघ्र स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।

सवाल- कोविड 19 से संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी कितना कारगर है ?
जवाब- अभी तक मेडिकल साइंस में कोविड 19 का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। इसके प्रयास चल रहे हैं। तब तक सपोर्टिव थेरेपी के रूप में कोविड संक्रमित मरीजों का उपचार प्लाज्मा थेरेपी से किया जा रहा है। कई जगह इसके रिजल्ट बेहद फायदेमंद आए हैं। इसी को देखते हुए क्लीनिकल मैनेजमेंट के रूप में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड 19 के मरीजों के लिए इसे रिकमंड किया है। कई प्रदेशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। इससे उपचार के बाद काफी मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। इसके लिए ऐसे लोगों के प्लाज्मा की जरूरत होती है जो इसके संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हों और स्वेच्छा से प्लाज्मा दान कर दूसरों की मदद को तैयार हों।

सवाल- कौन कर सकता है प्लाज्मा डोनेट ?
जवाब- कोविड 19 के उपचार के लिए इस संक्रमण से स्वस्थ होने वाले लोगों का प्लाज्मा ही कारगर है। संक्रमण से स्वस्थ होने वाले 18 से 65 वर्ष आयु का कोई भी व्यक्ति प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। इनका वजन 55 किग्रा से अधिक होना चाहिए। स्वस्थ हुए लोगों में कोविड 19 वायरस से मुकाबला करने वाले एंटीबाडीज मौजूद होते हैं। 90 दिन बाद एंटीबाडीज कम होने लगते हैं। ऐसे में 28 दिन से 90 दिन के बीच प्लाज्मा डोनेट करना चाहिए। प्लाज्मा डोनेट करने में भी ब्लड डोनेट करने वाले पैरामीटर लागू होते हैं। जिस तरह ब्लड डोनेट किया जाता है वैसे ही प्लाज्मा डोनेट होता है। हां इसमें ब्लड से सिर्फ प्लाज्मा ही लिया जाता है। ब्लड के दूसरे कंपोनेंट शरीर में ही रहते हैं।

सवाल- प्लाज्मा डोनेट करने के बाद कोई दिक्कत तो नहीं होती ?
जवाब- प्लाज्मा डोनेट भी ब्लड डोनेट करने के समान ही है। प्लाज्मा डोनेट करने वाले किसी व्यक्ति को कोई दिक्कत या कमजोरी नहीं होती। रक्तदाताओं की तरह ही इन्हें भी प्लाज्मा दान के बाद तरल पदार्थ ज्यादा सेवन और कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम से भरपूर आहार लेने की सलाह दी जाती है। प्लाज्मा डोनेट करने के इच्छुक व्यक्तियों को डोनेट करने से पहले आयली और फ्राइड भोजन नहीं करना चाहिए। एसआरएमएस में प्लाज्मा थेरेपी से कोविड 19 संक्रमितों के इलाज की अनुमित मिल गई है। हमने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल्द ही इससे इलाज शुरू होगा। हां इसमें कोविड संक्रमण से निजात पाने वालों से सहयोग की जरूरत है। अनुरोध है ऐसे लोग प्लाज्मा डोनेट कर दूसरे संक्रमितों को स्वस्थ करने में योगदान करें। जिससे दूसरे कोविड 19 मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकें।

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