181 साल का हो गया अपना बरेली कालेज

धरोहर

नुक्कड़ संवादताता, बरेलीः 17 जुलाई वर्ष 1837 को स्थापित अपना बरेली कालेज 181 साल का हो गया। इस उपलब्धि के बाद भी हालांकि मंगलवार को स्थापना दिवस पर कालेज में कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। अस्थायी कर्मचारियों की तालाबंदी के चलते शहीदों को श्रद्धांजलि देकर स्थापना दिवस की औपचारिकता पूरी की गई।
57 छात्रों के साथ स्थापित इस कालेज के पहले हेडमास्टर की जिम्मेदारी अंग्रेज सरकार ने मिस्टर रोजर्स को दी थी। रामपुर के नवाब द्वारा दी गई जमीन पर स्थापित इस कालेज के छात्रों ने पहले स्वतंत्रता संग्राम यानी गदर में अगुआई की। यहां के तमाम विद्यार्थी आंदोलन में शामिल हुए। यहां पढ़ाने वाले कुतुबशाह और मौलवी महमूद असहन जैसे शिक्षकों ने भी देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। कालेज की पुरानी इमारत आंदोलनकारियों का केंद्र बनी। शिक्षक कुतुबशाह को अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी। अंडमान स्थित जेल में उनकी मौत हुई। जासूसी के आरोप में यहां के छात्र मोहम्मद अली खान उर्फ जैमीग्रीन को लखनऊ में फांसी दे दी गई। जिसकी प्रतिक्रिया में खान बहादुर खान की अगुआई में आंदोलनकारियों ने कालेज के प्रधानाचार्य डा.कारलोस बक की हत्या कर दी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर यहां के तमाम विद्यार्थी आजाद हिंद फौज में भी शामिल हुए। छात्रसंघ का सारा कोष आजाद हिंद फौज को देने का प्रस्ताव रखा गया। वर्ष 1906 में यहां के आजाद छात्रावास की नींव रखी गई। यहां के छात्रों ने राष्ट्रीय आंदोलनों में प्रमुख भूमिका निभाई। यहां पढ़ने वाले आजादी के नायकों में शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह, दरबारी लाल शर्मा, सतीश कुमार, रमेश चौधरी, दामोदर स्वरूप और कृष्णमुरारी जैसे लोग शामिल हैं। यहां पढ़े शायर वसीम बरेलवी और बीसीसीआइ के सीईओ राहुल जौहरी जैसे तमाम विद्यार्थी आज भी देश विदेश में बरेली कालेज का नाम रोशन कर रहे हैं।

प्रबंध समिति ने नहीं लिया फैसला
बरेली कालेज की प्रबंध समित के अध्यक्ष डीएम हैं और सचिव एसआरएमएस ट्रस्ट के अध्यक्ष देवमूर्ति। काफी दिनों से अस्थायी कर्मचारियों के आंदोलन को न तो डीएम ने खत्म करवाने की कोशिश की और न ही प्रबंध समिति ने। जिसके चलते एतिहासिक कालेज के स्थापना दिवस पर एक बार फिर कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया।

आंदोलन की भेंट चढ़ा कार्यक्रम
पिछले तीन साल से कालेज में एक बार भी स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पाया है। शैक्षिक सत्र आरंभ होते ही कर्मचारियों का आंदोलन शुरू हो जाता है। जिससे स्थापना दिवस कार्यक्रम रद करना पड़ता है। इस बार भी अस्थायी कर्मचारियों की तालाबंदी से स्थापना दिवस कार्यक्रम रद करने पड़े।
-डा.वंदना शर्मा, चीफ प्राक्टर

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