जी, मुझे हिंदी कहते हैं…

हिंदी दिवस पर आत्मकथा के रूप में सुश्री सुकीर्ति का आलेख सभा में उपस्थित सभी का अभिवादन करते हुए मैं, हिंदी आज अपने ही दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में अपना परिचय, अपनी यात्रा व अपनी वर्तमान स्थिति अपसे साझा करती हूं। मेरी पूर्वज देवभाषा संस्कृत, जब कठिन व्याकरण व्यवस्था के कारण केवल […]

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ताइक्वांडो के ‘अखाड़े’ में तराशी जा रही ‘धाकड़ बेटियां’

कोच हरीश बोरा की मेहनत बरेली में भरने लगी रंग आज कई शिष्य लहरा रहे अपनी कामयाबी के झंडे नुक्कड़ संवाददाता, बरेलीः चीनी कुंगफू मास्टर की तरह कोच और अखाड़े जैसे माहौल। यहां खिलाड़ी नहीं, लड़ाके तैयार हो रहे हैं। ऐसे लड़ाके जिनको भले ही कभी मेडल के लिए मायूस होना पड़े लेकिन, जिंदगी की […]

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अध्यापकों और अभिभावकों को स्वयं को जानने का समय है पीटीएम

अध्यापक-अभिभावक सम्मिलन (पीटीएम) का औचित्य पर रजनीश त्रिवेदी का आलेख विद्यार्थी जीवन में खेल-कूद, पाठ्य सहगामी क्रियाओं एवं परीक्षाओं के अलावा जो महत्वपूर्ण घटना घटती है, वह है वर्ष में तीन-चार बार आयोजित होने वाली पीटीएम (अध्यापक-अभिभावक सम्मिलन)। बच्चे के प्रथम गुरु के रूप में माता-पिता (अभिभावक) का महत्त्व और कर्त्तव्य निर्विवाद है। विद्यालय में […]

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