जहां हिन्दू भावना कमजोर, वहीं पनपी अराजकताः भागवत

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भविष्य का भारत विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख ने रखे विचार
भारत एक प्रवृत्ति, हिन्दू है भाव, इसी को मजबूत कर रहा आरएसएस
भारतीयता की पहचान बनाए रख कर ही भविष्य के भारत का निर्माण
भविष्य की कल्पना के लिए इतिहास को याद रखना भी ज्यादा जरूरी
भविष्य का संपन्न भारत ही करेगा विश्व की समस्याओं का समाधान
अमित अवस्थी, बरेलीः भारत एक प्रवृत्ति है और हिन्दू भावना। प्राचीन काल से यही भावना देश को आत्मीयता से बांधे है। संस्कृतियों, पूजा पद्धतियों, भाषाओं, बिरादरियों और धर्म की विविधताओं के बाद भी यही भावना आज भी देश की अनेकता को एकता में पिरोए है। देश एक है। अस्तित्व की एकता एक है। हमारे पूर्वज एक हैं। हां जब भी जहां भी भारतीयता या हिन्दुत्व की भावना कमजोर हुई। वहीं राष्ट्रवाद कमजोर हुआ और अराजकता ने अपने पैर पसारे हैं। यह बात सरसंघचालक डा.मोहन भागवत ने कही।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क विभाग की ओर से रविवार (19 जनवरी 20) को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भविष्य का भारत विषय पर व्याख्यान आयोजित हुआ। सरसंघचालक डा.मोहन राव मधुकर राव भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण इस विषय पर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संघ के बारे में लगातार गलतफहमियां फैलाई जाती रही हैं। संघ की ओर से कभी इस पर सफाई नहीं दी गई। बस हम अपना काम करने में लगे रहे। आज भी वही कर रहे हैं। हमारा सपना समर्थ, शक्तिशाली और समृद्ध भारत का है। इसके लिए मनुष्य निर्माण अपेक्षित है। ऐसे मनुष्य जो आत्मीयता, समरसता से समन्वित होकर समाज में भाईचारा बनाएं। भारतीयता की पहचान बनाए रख कर राष्ट्र को समर्थ बनाने में अपना योगदान दें। इसके लिए हिन्दुत्व भाव जरूरी है। क्योंकि इसी भाव से देश बंधा हुआ है। उन्होंने पड़ोसी देश का नाम लिए बिना कहा कि जब भी यह हिन्दुत्व की भावना या भाव कमजोर हुआ, देश में अराजकता हुई और वह हिस्सा अलग हो गया। ऐसे में भारतीयता की पहचान बनाए रखना जरूरी है। अब फिर से देश के बारे में सोचने का समय है। उन्होंने कहा कि भविष्य के भारत के बारे में सोचते समय इतिहास को भी याद रखना पड़ेगा और उसमें हुई भूलों को भी।
सरसंघचालक ने कहा कि वर्ष 2017 में दिल्ली में पहली बार भविष्य का भारत विषय पर संघ ने अपने विचार रखे। अपना विजन लोगों के बीच रखा। बताया कि भविष्य का भारत कैसा होना चाहिए। इसके लिए उसे कौन कौन सी चुनौतियों से निपना चाहिए और भविष्य में क्या चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। हम अपने विचारों के साथ लोगों के पास गए। इसे सराहा गया। इसके बाद हमने फैसला किया कि हम भविष्य के भारत पर अपने विचारों के साथ आम लोगों के पास जाएंगे। इसी क्रम में इस विषय पर देश भर में व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। डा.भागवत ने स्पष्ट किया कि भविष्य के भारत का सपना संघ ने ही नहीं देखा। बल्कि उनसे पहले भी कई महापुरुषों ने भविष्य के भारत पर लेख लिखे हैं। आम हिन्दुस्तानी भी भविष्य के बारे में बात करता है। ऐसे में सभी के सम्मिलित प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने सुख-दुख में एक दूसरे के भागीदार बनने का भी अनुरोध किया।

टैगोर, गांधी और अंबेडकर ने भी देखा भविष्य के भारत का सपना
सरसंघचालक ने कहा कि अंग्रेजों से देश को आजाद कराने का विचार 1857 को आया। जब मंगल पांडेय ने क्रांति की मशाल जलाई। हालांकि इससे पहले भी यह विचार फलफूल रहा था। इसी तरह संघ ने भविष्य के भारत का जो सपना देखा है, वह भी पहले देखा जा चुका है। रविंद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी और बाबा साहब अंबेडकर भी भविष्य के भारत की रूपरेखा खींच चुके हैं। वर्ष 1947 से पहले तो सभी दलों और विचारधाराओं के लोगों ने आजाद भारत का सपना सम्मिलित रूप से ही देखा। बाद में उनमें बिखराव हुआ। गांधी की उदारता को मानने वाले गांधीवादी कहलाए। अपनी विचारधारा के साथ वामपंथी अलग हुए और समाजवाद के साथ दूसरे। उसके बाद देश को समृद्ध और शक्तिशाली सपना देखने वालों को राष्ट्रवादी नाम दे दिया गया। डा.भागवत ने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर ने 1905 में स्वदेश समाज नाम से निबंध लिखा था। जिसमें रूढ़ि-कुरीतियों से पूर्णतः मुक्त, शिक्षित, निर्भर और स्वाभिमानी एकात्म भारत की कल्पना की थी। भागवत ने महात्मा गांधी के सपनों के भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी सक्षम, समर्थ और शक्तिशाली बनने के लिए सात पापों से रहित भारत की कल्प्ना की थी। उन्होंने इन्हें सिद्धांतों के बिना राजनीति, परिश्रम के बिना संपत्ति, अंतरात्मा के बिना आनंद, चरित्र के बिना ज्ञान, नैतिकता के बिना वाणिज्य, मानवता के बिना विज्ञान, त्याग के बिना पूजा बताया। सरसंघचालक ने बाबासाहब डा.भीमराव अंबेडकर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डा.अंबेडकर ने भी संविधान लागू होने के दौरान संसद में दिए भाषणों में भविष्य के भारत की कल्पना की थी। संघ की सोच इन महापुरुषों से अलग नहीं है।

हमारे साथ आजाद हुए देश संपन्न हुए, आगे निगले हम नहीं, क्यों
भागवत ने कहा कि तमाम महापुरुषों द्वारा भविष्य के भारत की सोच के बाद भी आज भारत उस ओर बढ़ता नहीं दिखाई देता। आजादी के 70 साल बाद भी सपने का साकार न हो पाने का सवाल बड़ा है। जबकि लगभग हमारे साथ ही आजाद हुए इस्राइल, जापान और जर्मनी जैसे देश आज कहीं से कहीं पहुंच गए। हमसे काफी आगे निकल गए और हम अब भी अपनी आधारभूत आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। इस्राइल ने तो आजादी के बाद तमाम युद्ध झेले। इनसे निकलने के बाद आज वह ताकतवर और संप्रभुता वाला देश है। किसी भी मुल्क की हिम्मत उसकी ओर आंख उठा कर देखने की भी नहीं। हम कहां पिछड़ गए। आज इस पर विचार करना आवश्यक है। आजादी के बाद इंग्लैंड से मिलने वाले 30 हजार करोड़ रुपया भी हम अब तक नहीं वसूल पाए। समृद्धशाली देश के बारे में डा.हेडगेवार का विचार नया नहीं है। समस्या गुलाम होने की मानसिकता में है। हमारी कमियां हैं। उन्हें दूर करना जरूरी है। समृद्ध राष्ट्र के लिए एक साथ चिंतन जरूरी है। भारत में रहने वाले सभी भारतीय हैं और सभी को संप्रदाय, धर्म और भाषा के झगड़ों से ऊपर उठ कर समृद्ध देश के लिए सोचना पड़ेगा। सुख दुख में एक दूसरे से भागीदारी निभानी पड़ेगी।

जिसके पूर्वज हिन्दू थे वह सब आज भी हिन्दू ही हैं और कुछ नहीं
भागवत ने अथर्ववेद का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म भाव है और भारत में अनेक धर्म (भाव) को मानने वाले लोग हैं। सभी की पूजा पद्धति अलग है और भाषाएं भी। यहां आस्तिक भी हैं और नास्तिक भी। इसके बाद भी सभी हिन्दू हैं। क्योंकि हिन्दू एक भावना है। यही विविधता पूर्ण राष्ट्र की एकता है। हिन्दू भावना ही राष्ट्र को जोड़े हुए है। इसे भूलना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि जिसके पूर्वज हिन्दू थे वह हिन्दू है। आप भारतीय भी कह सकते हैं। या कुछ और भी। सभी भारतमाता की संतान हैं। संघ शब्दों के फेर में नहीं पड़ता। शब्द कोई भी हो हमें एतराज नहीं। सब अपने हैं।

संघ का एकमात्र एजेंडा है मनुष्य निर्माण और मजबूत हिंदू भावना
उन्होंने नैतिकतापूर्ण और राष्ट्रवादी मनुष्य निर्माण निर्माण पर जोर दिया। कहा कि संघ का एकमात्र एजेंडा मनुष्य निर्माण है। राष्ट्रवादी भावना को मजबूत करना ही संघ का एकमात्र उद्देश्य है। संघ के स्वयंसेवक इसके लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। शाखाएं लगाना इसका अनिवार्य अंग है। भागवत ने संघ की मुस्लिम विंग का जिक्र करते हुए सभी के लिए संघ के दरवाजे खुले होने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, जाति और बिरादरी का व्यक्ति संघ में आ सकता है। यहां सभी का स्वागत है। हम सभी के विचारों का सम्मान करते हैं। लेकिन हम संविधान को मानते हैं। इसका सम्मान हमारी प्राथमिकता है। इसका विरोध करने वाले हमारे विरोधी हैं। उन्होंने देश निर्माण में सभी के साथ का आह्वान किया। कहा कि आप अपनी भाषा बोलो, अपनी पूजा पद्धति अपनाओ। राष्ट्र निर्माण में साथ आओ हमारी सद्भावना आपके साथ है।

विचारधारा और काम जाने बिना संघ प्रति गलतफहमियां फैलाई गईं
भागवत ने कहा कि संघ के बारे में लगातार गलतफहमियां फैलाई जाती रही हैं। संघ के कामों पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। हमको गुलाम बनाने वाले अंग्रेजों ने यही किया। आज भी अंग्रेजों जैसी विचारधारा वाले लोग यही कर रहे है। संघ का राजनीति से कोई वास्ता नहीं। इसके बाद भी हमारे खिलाफ दुष्प्रचार जारी है। लोगों में वहम पैदा किया जाता है। कहा जाता है कि संघ वाले जालिम हैं। वर्षों में हम एक दोस्त जोड़ते हैं। फिर भी समाज को तोड़ने वाले राष्ट्रविरोधी हम पर सवाल उठाते हैं। फिर भी हमारे मन में किसी के लिए कोई अविश्वास नहीं। हमारी आलोचना होनी चाहिए। विचारधारा पर भी बात हो, लेकिन तथ्यों पर। न कि पूर्वाग्रह के आधार पर। गलतफहमियों पर आधारित विरोध ठीक नहीं। संघ प्रमुख ने सभी विचारधारा वाले लोगों का संघ में आकर उसके बारे में जानने का आह्वान किया। कहा कि आप हमारे यहां आइये। रहिये। देखिये। तथ्यों की कसौटी पर हमें परखिये। फिर हमारे बारे में धारणा बनाइये। सिर्फ विचारधारा के आधार पर नहीं। उन्होंने कहा कि संघ तो प्रेम और सत्य को लेकर चलने वाला संगठन है। इसे समाप्त करने वाले समाप्त हो गए। हम पर लगने वाला हर आरोप उन्हीं पर साबित होता आया है। संघ से डर दिखा कर लोग अपने पीछे भीड़ इकट्ठा करते हैं। यह उनके अपने प्रचार का तरीका है।

जनसंख्या साधन और समस्या दोनों
संघ प्रमुख ने देश की जनसंख्या को साधन और समस्या दोनों बताया। बोले वैश्विक दृष्टि से देखें तो हमारी जनसंख्या साधन भी है और समस्या भी। इसके नियंत्रण के बारे में संघ ने कभी कोई बयान नहीं दिया। इसके बाद भी लोग समझते हैं कि संघ ज्यादा बच्चों वालों के खिलाफ है। ऐसा नहीं है। कई बार बिना कहे हमारे संबंध में बातें गढ़ ली जाती हैं। दो बच्चों की नीति के संबंध में हमारी ओर से कभी कोई विचार नहीं रखा गया। इसके बाद भी लोग मानते हैं कि संघ दो बच्चों की नीति का समर्थक है। भागवत ने कहा कि जनसंख्या के संबंध में हमारा कोई एजेंडा नहीं है। हां इतना जरूर है कि एक नीति बनाने के पक्ष में हम जरूर हैं। यह नीति सभी से बात कर बनाई जानी चाहिए। इस संबंध में सरकार को सबसे बात करनी चाहिए। सबके पास जाना चाहिए। राष्ट्र निर्माण के सिवाय संघ का कोई छुपा हुआ एजेंडा नहीं है।

जिस दिन सोया राष्ट्र जगेगा
जिस दिन सोया राष्ट्र जगेगा
दिस दिस फैला तमस हटेगा
भारत विश्व बंधु का गायक
भारत मानवता का नायक
सदियों से था युगों रहेगा…
वैभवशाली जब हम होंगे
नहीं किसी से कम हम होंगे
क्यों न फिर कम तर्फ मिलेगा…
हम सब की तो राह एक है
कोटि हृदय और भाव एक है
बात हमारी विश्व सुनेगा…

यह रहे मौजूद
महानगर सरसंघचालक अतुल खंडेलवाल, राष्ट्रीय सेवा भारती के पूर्व अध्यक्ष सूर्य प्रकाश, महापौर डा.उमेश गौतम, केंद्रीय राज्यमंत्री संतोष गंगवार, पूर्व वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक धर्मपाल सिंह, विधायक राजेश मिश्रा, विधायक अरुण कुमार, विधायक केसर सिंह गंगवार, विधायक श्याम बिहारी लाल, डा.विवेक मिश्रा, आलोक प्रकाश, भवानी सिंह, प्रवीण भारद्वाज, कुलमोहन अरोड़ा, मनीष अग्रवाल, डा.अतुल अग्रवाल, डा.लतिका अग्रवाल, गुरु मेहरोत्रा, डा.केशव अग्रवाल, डा.विमल भारद्वाज, डा. राघवेंद्र शर्मा, डा.आदित्य महेश्वरी, डा.रजनीश वाष्णेय, अशोक गोयल, नरेंद्र गुप्ता, रुहेलखंड विवि के कुलपति अनिल कुमार शुक्ला, कानपुर विवि की कुलपति डा.नीलिमा गुप्ता, राजकुमार अग्रवाल, रवि प्रकाश अग्रवाल, डा.अशोक अग्रवाल, डा.शरद अग्रवाल, डा.रजत अग्रवाल, गुलशन आनंद, रमेश जैन, संजीव अग्रवाल, उमेश कठेरिया, मनोज यादव, मनोज थपलियाल, अजय जेटली, नीरेंद्र राठौर, अधीर सक्सेना, प्रदीप तिवारी, प्रत्येश पांडेय, डा.हिमांशु अग्रवाल, मनीष शर्मा, संभव शील सहित शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।




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