इस नवरात्र नौका पर सवार होकर आएंगी मां 

व्रत त्यौहार

नुक्कड़ संवाददाता, बरेलीः बुधवार (10 अक्टूबर) से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि 19 अक्टूबर को समाप्त होंगे। इस बार मां नौका से आ रही हैं। इसका अर्थ है कि इस बार देवी पृथ्वी के समस्त प्राणियों की इच्छाओं को पूर्ण करेंगी। जो भी भक्त मां का श्रद्धापूर्वक पूजन, व्रत, निर्मल मन से शुभ फल की इच्छा करेंगे, मां दुर्गा उनकी मनोकामना पूर्ण करेंगी। देवी नवरात्रि के अंतिम दिन यानि विजयदशमी को पृथ्वी से कैलाश की ओर हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी. मां के प्रस्थान का अर्थ है कि मां अच्छी फसल के साथ ही सुख और समृद्धि का वरदान देकर जाएंगी। यह जानकारी त्रिअम्बिकेश ज्योतिष एवं अनुसंधान केंद्र के आचार्य अभिषेक कृष्ण गौड़ ने दी। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन की है। इस नवरात्रि इसलिए खास है क्योंकि इसकी शुरुआत चित्रा नक्षत्र में होगी। वहीं महानवमी का आगमन श्रवण नक्षत्र में होगा। इस दिन ध्वज योग बन रहा है, जिसके कारण सुख और वैभव बढ़ेगा। इस बार पहली नवरात्रि के दिन घट स्थापना होगी और इसी दिन दूसरी नवरात्रि भी मनाई जाएगी। एक नवरात्रि के कम होने के बाद भी नवरात्रि नौ दिनों की ही होगी।
आचार्य अभिषेक कृष्ण गौड़ ने कहा कि देवीभागवत् में बताया गया है कि ‘शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता’ अर्थात- रविवार और सोमवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार और मंगलवार को कलश स्थापना होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं, जबकि बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं। आचार्य गौड़ ने कहा कि नवरात्रि के दिनों पूजन प्रयोग में सरस्वती, महाकाली, महालक्ष्मी, लक्ष्मी या दुर्गाजी के चित्र-यंत्र-प्रतिमा का प्रयोग किया जा सकता है। नवरात्रि में कुछ प्रयोगों से मनचाही कामना पूरी की जा सकती है।
(1) ज्ञान वैराग्य के लिए- ‘ॐ ऐं नम:’ स्फटिक माला से सरस्वतीजी का चित्र श्वेत वस्त्र पर स्‍थापित कर 11 माला नित्य करें। यथासंभव घी की आहुति दें। मंत्र के आगे ‘स्वाहा’ का प्रयोग करें।
(2) ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए – ‘ॐ ह्रीं नम:’ लाल चंदन की मा‍ला, रक्त वर्ण वस्त्र आसनादि पुष्प लेकर 11 माला नित्य करें। घृत-मधु-शर्करा मिश्रण कर आहुति दें। रुद्राक्ष की माला भी ले सकते हैं।
(3) शत्रु बाधा दूर करने हेतु- ‘ॐ क्लीं नम:’ काले हकीक की माला या रुद्राक्ष माला, रक्त वर्ण पुष्प, आसन, वस्त्रादि तथा महाकाली के चित्र को स्थापित कर 11 माला नित्य करें। अंत में घृत की आहुति दें।
(4) धन प्राप्ति हेतु- ‘ॐ श्रीं नम:’ तथा कमल पर बैठी लक्ष्मी का चित्र, गुलाबी आसन, वस्त्र, कमल गट्टे की माला, गुलाब-कमल के पुष्प से अर्चन कर घृत-मधु-शर्करा से अंत में यथाशक्ति आहुति दें।
(5) शत्रु शांति- कर्जमुक्ति इत्यादि के लिए- श्री दुर्गाजी के चित्र को रक्तवर्ण आसन, वस्त्र, पुष्पादि से पूजन कर ‘ॐ दुर्गेरक्षिणि-रक्षिणि’ स्वाहा की 9 माला रुद्राक्ष माला से नित्य करें तथा गौघृत-मधु-शर्करा से आहुति दें।
(6) जमीन-जायदाद, मकान इत्यादि की प्राप्ति के लिए -‘ॐ लं ॐ’ का जप करें। 11 माला नित्य करें।
(7) वशीकरण करने के लिए – ‘ॐ क्रीं ॐ’ की 11 माला नित्य करें तथा घृत-मधु-शर्करा की आहुति दें। विशेष आहु‍ति कटु तेल, लाल चंदन, राई, मधु और अशोक पुष्प की दें।
(8) पुत्र प्राप्ति के लिए- ‘ॐ क्रीं नम:’ की 11 माला नित्य कर गौघृत की आहुति दें।

शारदीय नवरात्र‍ि: कलश स्थापना का मुहूर्त
आचार्य अभिषेक कृष्ण गौड़ के अनुसार 9 अक्‍टूबर को सुबह 9:16 ही इस बार अमावस्‍या समाप्‍त हो जाएगी। इसके बाद प्रतिपदा लग जाएगी, जो अगले दिन यानी 10 अक्‍टूबर को सुबह 7:25 बजे तक रहेगी। कलश स्‍थापना शुक्‍ल प्रतिपदा को ही की जाती जाती है। ऐसे में जातक 10 अक्‍टूबर को सुबह 7:25 बजे तक कलश स्‍थापना कर सकते हैं। कलश स्‍थापना के लिए यह सबसे शुभ समय होगा। आचार्य गौड़ के अनुसार अगर इस दौरान किसी वजह से आप कलश स्‍थापित नहीं कर पाते हैं तो 10 अक्‍टूबर को सुबह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्‍थापना कर सकते हैं। ध्‍यान रहे कि शास्‍त्रों के अनुसार अमावस्‍यायुक्‍त शुक्‍ल प्रति‍पदा मुहूर्त में कलश स्‍थापित करना वर्जित होता है। इसलिए किसी भी हाल में 9 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना नहीं होगी।

नवरात्र में यह करें काम
नवरात्र में माता दुर्गाजी को शहद को भोग लगाने से भक्तो को सुंदर रूप प्राप्त होता है व्यक्तित्व में तेज प्रकट होता है।
नवरात्र में माँ दुर्गा की आराधना “लाल रंग के कम्बल” के आसन पर बैठकर करना अति उत्तम माना गया है। इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
नवरात्र में स्थाई लक्ष्मी प्राप्ति के लिए नित्य पान में गुलाब की 7 पंखुरियां रखकर मां दुर्गा को अर्पित करें ।
नवरात्रि में पूजा के समय प्रतिदिन माता को शहद एवं इत्र चढ़ाना न भूले। नौ दिन के बाद बचे हुए शहद व इत्र को माता का स्मरण करते हुए खुद के लिए इस्तेमाल करें। इससे मां की कृपा प्राप्त होती है।
नवरात्र में इन दो में से किसी भी एक मंत्र का अधिक से अधिक जप करने पर हर इच्छा पूरी होती है
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।।
या
ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
नवरात्र में प्रात: श्रीरामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से हर कार्य सफल होते है, साथ ही व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्त विघ्न बाधाएं शांत होती हैं।

नवरात्रि के व्रत में इन बातों का रखना चाहिए खास ख्याल: 
– नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए. इस दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ होता है।
– नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।
– अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं, माता की चौकी का आयोजन कर रहे हैं या अखंड ज्योति‍ जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाएं।
– इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और नॉन वेज बिल्कुल न खाएं।
– नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
– व्रत रखने वाले लोगों को बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
– व्रत रखने वालों को नौ दिन तक नींबू नहीं काटना चाहिए।
– व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. खाने में कुट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, आलू, मेवे, मूंगफली खा सकते हैं।
– विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है।

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